गुल्लक सीजन 4 समीक्षा: पालन-पोषण और परिपक्वता की चमकती कहानी

मीश्रा परिवार की नई चुनौतियाँ

'गुल्लक' का चौथा सीजन, जो Sony Liv पर प्रीमियर हुआ है, अपने पिछले सीजनों की तरह फिर से मीश्रा परिवार की कहानी को जीवन्तता से दर्शाता है। इस बार की कहानी में कई नई परतें जोड़ी गई हैं, जिसमें संतोष मीश्रा (जमील खान) और शांति मीश्रा (गीतांजलि कुलकर्णी) की पारिवारिक कठिनाइयाँ और उनके बच्चों की बढ़ती उम्र की चुनौतियाँ प्रमुख रूप से सामने आती हैं।

पालन-पोषण की दुविधाएँ

इस सीजन की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह पालन-पोषण और परिपक्वता पर गहराई से विचार करता है। Ann (वैभव राज गुप्ता) और Aman (हर्ष मायर) की उम्र बढ़ चुकी है और इससे उनके जीवन में नए बदलाव और समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। Ann नौकरी और प्रेम की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जबकि Aman अपने किशोरावस्था में प्रवेश कर चुका है, जिससे उसकी सोच और कार्यों में परिवर्तन आ रहा है।

संतोष और शांति के किरदार इस बदलाव के चलते नए संघर्षों का सामना करते हैं। उनके ऊपर बच्चों की सही परवरिश की जिम्मेदारी होती है और वे इसका निर्वहन करते रहने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। बच्चों की शिक्षा, करियर और व्यक्तिगत जीवन के मूल्यांकन के दौरान आने वाली परेशानियाँ और उनसे निपटने के तरीके कहानी की मुख्य धारा को बनाते हैं।

किरदारों का सजीव चित्रण

किरदारों का सजीव चित्रण

मीश्रा परिवार के किरदारों को जिस तरह से चित्रित किया गया है, वह दर्शकों को इससे बंधे रहने के लिए मजबूर करता है। संतोष और शांति की भूमिका में जमील खान और गीतांजलि कुलकर्णी ने अपने बेहतरीन अभिनय से जीवंतता ला दी है। वहीं Ann और Aman के किरदारों में वैभव राज गुप्ता और हर्ष मायर ने अपने पात्रों को बहुत ही सजीवता से पेश किया है।

निक्की का अनोखा संवेदना

इस सीजन में Bittu की माँ का प्रवेश एक विशेष स्पर्श जोड़ता है। सुमिता राजवार इस भूमिका में बेहद प्रभावशाली हैं और उनके साथ की हर एक सीन एक विशेष जुड़ाव को प्रकट करता है। उनकी उपस्थिति से सीरीज़ में विभिन्न परिप्रेक्ष्य देखने को मिलते हैं और परिवार की कठिनाइयों में सजीवता उत्पन्न होती है।

इस बार कहानी को नए दिशा देने के लिए लेखक विदित त्रिपाठी और निर्देशक श्रेयांश पांडेय ने धीरे-धीरे लेकिन प्रभावी तरीके से प्रसारित किया है। यह जोड़ी मीश्रा परिवार की केमिस्ट्री को बनाए रखते हुए नई ऊचाइयों तक पहुंचाने में सफल रही है।

अधूरी दुनिया

अधूरी दुनिया

इस सीजन की एक महत्वपूर्ण कमी यह है कि मीश्रा परिवार की दुनिया को और विस्तारित करने की आवश्यकता है। इसके लिए नए पात्रों का परिचय किया जा सकता है, जैसे Heli Shah को Ann की बॉस और Surya Narayan को Aman के दोस्त के रूप में शामिल किया जा सकता है। इससे कहानी में और गहराई आएगी और दर्शक अधिक गहरे से इससे जुड़ सकेंगे।

सेजन्स की थांत अच्छी तरह से बनाकर प्रस्तुत की गई है, लेकिन इसके बावजूद इसे और अधिक विस्तारित करने की आवश्यकता है ताकि मीश्रा परिवार की दुनिया और व्यापक हो सके।

इसकी पांच-एपिसोड श्रृंखला दर्शकों को अंत तक बांधे रहने में सफल रही है और वे यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आगे मीश्रा परिवार के साथ क्या होता है। लेकिन कहानी को और गहराई देने और नए पात्रों को जोड़ने से उसकी पूर्णता और सोने पर सुहागा हो सकती है।

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टिप्पणि

Vidyut Bhasin

Vidyut Bhasin

7 जून 2024

ओह, 'गुल्लक' ने फिर से वही पुरानी परिपक्वता की कहानी ढलाई है, जैसे कोई नयी दाल में पुराने मसाले मिलाते हों। क्या हमें ये दलील पसंद नहीं कि बच्चों को बड़ी बारीकी से देखते रहने के बजाय खुद का रीयलिटी शो चलाएँ? वैभव के करियर मोमेंट को देखकर लगता है कि शो को भी एक प्रोफेशनल मोमेंट चाहिए। फिर भी, मीश्रा परिवार की समस्याएँ इतनी बड़ी हैं कि हर एपिसोड को एक थ्योरी पड़ाव समझा जा सकता है। खैर, यह नया सीजन बस वही पुरानी बातों को फिर से दोहराने का एक लूप है।

nihal bagwan

nihal bagwan

20 जून 2024

गुल्लक के इस चौथे सीजन में जिस प्रकार से पारिवारिक दुविधाओं को प्रस्तुत किया गया है, वह वास्तव में भारतीय परिवारों की जटिलता को प्रतिबिंबित करता है। संतोष और शांति की भूमिका में प्रस्तुत किए गए संघर्ष धीरे-धीरे सामाजिक मूल्यों की परिवर्तनशीलता को उजागर करते हैं। बच्चों की उम्र बढ़ने के साथ उनके शैक्षिक और व्यावसायिक विकल्पों में विविधता आती है, जो आज की पीढ़ी के लिए अनुकरणीय है। वैभव और हर्ष ने अपने किरदारों में जो गहराई लगाई है, वह दर्शकों को वास्तविक जीवन के प्रतिबिंब के रूप में आकर्षित करती है। लेखिका विदित त्रिपाठी ने कहानी को ढालते हुए सामाजिक संदेशों को सहजता से शामिल किया है। निर्देशक श्रेयांश पांडेय ने दृश्यात्मक रूप से इस जटिलता को संतुलित किया है। हालांकि, कुछ दर्शकों को नया पात्रों का परिचय अभावपूर्ण लगा, जिससे कथा में गहराई की कमी महसूस हुई। इस परिपक्वता की चमकती कहानी को अगर अतिरिक्त सामाजिक मुद्दों से जोड़ दिया जाता, तो यह और अधिक प्रासंगिक बन जाता। कुल मिलाकर, यह सीजन भारतीय टेलीविजन के लिए एक सकारात्मक कदम है, जो दर्शकों को सोचने के लिए प्रेरित करता है।

Arjun Sharma

Arjun Sharma

3 जुलाई 2024

भाइयों, इस सीजन में तो पूरे ए..पी..सी.. (एजुकेशन, प्रोक्योरमेंट, करिअर) का डांस है, मज़ा आ गया। एनी के जॉब ग्रोथ और अमन के टिंडर स्टोरीज देख के लगे कि हम सब फ्री लैन में फँसे हैं। टॉपिक इस तरह से रैप किया गया है कि बॉस लोग भी सोचेंगा, "वो क्या बात कर रहे हैं?" बस, एली शा और सूर्य नारायण जोड़ो तो फुल 360 डिग्री कंवेंशन complete हो जाएगा।

Sanjit Mondal

Sanjit Mondal

16 जुलाई 2024

सभी को नमस्कार, मैं इस चर्चा में कुछ संरचनात्मक सुझाव देना चाहता हूँ। यदि हम बच्चों की शैक्षणिक योजना को विस्तृत रूप से प्रस्तुत करें तो दर्शकों की समझ बढ़ेगी। साथ ही, पारिवारिक संवादों में सांस्कृतिक बारीकियों को शामिल करने से गहराई आएगी। इस तरह के समावेशी दृष्टिकोण से श्रृंखला अधिक संवादात्मक बन सकती है। 😊

Ajit Navraj Hans

Ajit Navraj Hans

29 जुलाई 2024

देखो भाई लोग, इस शो में हर चीज़ को बहुत फॉर्मल बना रखा है, थोड़ा रैप अप करो, मज़ा आएगा, लीजिए, बड़ा फ़ॉलो इफेक्ट चाहिए तो. कहानी में साइड क्वेस्ट नहीं, बस मेन प्लॉट ही चलाओ. और हाँ, कमेंटस में एनी की नौकरी को इतना बड़ाया, असल में तो वही रोज़ के 9‑5 से फँसा. बस यही तो है असली शो की वाइब.

arjun jowo

arjun jowo

11 अगस्त 2024

दोस्तों, यदि हम बच्चों को सही दिशा में प्रेरित करें तो उनका भविष्य उज्ज्वल हो सकता है। यही कारण है कि इस सीज़न में पेरेंटिंग के पहलुओं को दिखाना महत्वपूर्ण है। छोटे‑छोटे कदमों से बड़ी सफलता मिलती है। चलिए, सभी मिलकर इस संदेश को फैलाते हैं।

Rajan Jayswal

Rajan Jayswal

24 अगस्त 2024

बहुत ही तुच्छ रूप से प्रस्तुत किया गया है。

Simi Joseph

Simi Joseph

5 सितंबर 2024

अरे भाई, तुम्हारा जार्गन इतना भारी है कि कोई भी समझ नहीं पाता, हल्का करो, थोड़ा स्याह‑सफेद रखो।

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