बाढ़ और तूफानी हवाएँ: भारत में प्राकृतिक आपदाओं की वास्तविकता
जब बारिश इतनी ज़ोरदार हो जाए कि नदियाँ तट पार कर जाएँ और हवाएँ छतें उड़ा दें, तो ये बाढ़ और तूफानी हवाएँ, प्राकृतिक आपदाएँ जो भारत के लाखों लोगों के घर, जीवन और आजीविका को नष्ट कर देती हैं बस खबरों का हिस्सा नहीं रह जातीं। ये वो चीज़ें हैं जो गाँव के बच्चे को स्कूल से दूर कर देती हैं, शहर के घरों को पानी में डुबो देती हैं, और खेतों को बर्बाद कर देती हैं। ये आपदाएँ किसी एक राज्य की समस्या नहीं — ये बिहार की गंगा के किनारे, ओडिशा के समुद्री तट, असम के बाढ़ वाले इलाकों और महाराष्ट्र के शहरों में भी दोहराई जाती हैं।
इन तूफानों के पीछे केवल मौसम नहीं, बल्कि मौसम अलर्ट, जो लोगों को जल्दी से बचाव के लिए तैयार करता है और राज्य स्तरीय प्रतिक्रिया, जिसमें बचाव और बहाली की योजनाएँ बनती हैं भी शामिल हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि दिल्ली में स्कूल बंद होने का कारण सिर्फ धूल नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश या बिहार से बहकर आने वाली बाढ़ का पानी हो सकता है? या फिर गुवाहाटी के क्रिकेट मैच का रद्द होना एक तूफानी हवा के कारण हुआ हो? ये सब जुड़े हुए हैं। जब एक जगह बाढ़ आती है, तो दूसरी जगह की खबरें भी बदल जाती हैं — शेयर बाजार डगमगाता है, खाद्यान्न की कीमतें बढ़ जाती हैं, और स्कूलों की छुट्टियाँ लंबी हो जाती हैं।
यहाँ आपको ऐसी ही असली कहानियाँ मिलेंगी — जहाँ बाढ़ ने किसान को उसकी फसल छीन ली, तूफान ने एक पूरे गाँव को बिजली और पानी के बिना छोड़ दिया, और लोगों ने अपने घरों के बर्बाद होने के बाद भी जीवन जारी रखा। आपको यहाँ बाढ़ के बाद बचे लोगों की लड़ाई, उनके बच्चों की शिक्षा की तलाश, और उन लोगों की कहानियाँ मिलेंगी जिन्होंने तूफान के बीच भी अपना जीवन जीने की कोशिश की। ये सब खबरें आपको बताएँगी कि ये आपदाएँ केवल प्राकृतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक भी हैं।
साइक्लोन दित्वाह ने तमिलनाडु की ओर बढ़ाई गई धमकी: कावेरी डेल्टा में लाल चेतावनी, चेन्नई-कोलंबो फ्लाइट्स बाधित
साइक्लोन दित्वाह तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा और पुडुचेरी की ओर बढ़ रहा है, जिससे लाल चेतावनी जारी की गई है। बाढ़, तूफानी हवाएं और उड़ानों की बाधा के साथ, IMD ने 30 नवंबर तक अलर्ट जारी रखा है।
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