साइक्लोन दित्वाह ने तमिलनाडु की ओर बढ़ाई गई धमकी: कावेरी डेल्टा में लाल चेतावनी, चेन्नई-कोलंबो फ्लाइट्स बाधित

जब तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में लोग सुबह की चाय पी रहे थे, तब भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने एक ऐसी चेतावनी जारी की जिसने सबके दिल को थम दिया — साइक्लोन दित्वाह अब सिर्फ एक नक्शे पर नहीं, बल्कि अपनी तूफानी सांसों से तमिलनाडु के कानून को हिला रहा था। शुक्रवार, 28 नवंबर, 2025 को सुबह 8:30 बजे (IST) जब दिल्ली के IMD के केंद्र में डेटा अपडेट हुआ, तो साइक्लोन श्रीलंका के त्रिंकुलमली के 40 किमी दक्षिण-पश्चिम में था — लेकिन उसकी गति सिर्फ 4 किमी/घंटा नहीं, बल्कि इसकी दिशा ने तमिलनाडु के लिए एक भविष्यवाणी कर दी: रविवार, 30 नवंबर की सुबह तक यह चेन्नई, पुडुचेरी और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट पर पहुंच जाएगा। यह नहीं कोई आम बारिश है। यह एक ऐसा तूफान है जिसने कावेरी डेल्टा के खेतों को खतरे में डाल दिया है — जहां भारत का आधा चावल उगाया जाता है।

लाल चेतावनी: कावेरी डेल्टा के जिलों के लिए जानलेवा खतरा

IMD ने थांजावूर, तिरुवारूर, नागपट्टिनम और मयिलादूतूरै जैसे जिलों के लिए लाल चेतावनी जारी की है — जो देश के सबसे उपजाऊ खेतों के लिए बरसात की अपेक्षा नहीं, बल्कि बाढ़ की आशंका है। इन जिलों में मिट्टी पहले से ही भरी हुई है, और अगले 24 घंटों में अत्यधिक वर्षा के कारण सतही बहाव और बाढ़ की संभावना है। यही वजह है कि जब आप बारिश की बात करते हैं, तो यहां लोग नहीं, बल्कि अपने खेतों के बारे में सोचते हैं। यहां एक किसान के लिए एक बारिश का मतलब सिर्फ नमी नहीं, बल्कि आखिरी साल की कमाई होती है।

इसके अलावा, तिरुचिरपल्ली, तिरुनेलवेली, तिरुप्पूर, तूतीकोरिन और वीरूधुनगर जैसे जिलों में भी बाढ़ का खतरा है। यहां के लोग अब बस बारिश का इंतजार नहीं कर रहे — वे अपने घरों के छतों को बांध रहे हैं, बंदूकों को उठा रहे हैं, और बच्चों को ऊपर की मंजिल पर भेज रहे हैं।

हवाएं, बिजली, और बाढ़: तीन खतरे एक साथ

IMD के अनुसार, दक्षिणी तमिलनाडु के तट पर 60-70 किमी/घंटा की गति से हवाएं चल रही हैं, जो कभी-कभी 80 किमी/घंटा तक पहुंच सकती हैं। यह गति किसी आम तूफान की नहीं — यह एक ऐसी हवा है जो छोटे घरों की छतें उड़ा सकती है, बिजली के खंभे गिरा सकती है, और ट्रकों को उलट सकती है। राष्ट्रीय समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) ने बताया कि पुडुचेरी बंदरगाह पर साइक्लोन चेतावनी संकेत नंबर 2 लगाया गया है — जिसका मतलब है कि नावें बंद हैं, और समुद्र बहुत खराब है।

और फिर बाढ़। यह तूफान न सिर्फ हवा ला रहा है, बल्कि बारिश भी। जिन शहरों में पहले से ही नालियां भरी हुई हैं — चेन्नई, तिरुचिरपल्ली, तिरुनेलवेली — वहां नीचे की सड़कें बह रही हैं। अंडरपास बंद हो चुके हैं। कुछ जगहों पर देखा गया कि बारिश के कारण दृश्यता घट गई है, और वाहन चलाना असंभव हो गया है। एक चेन्नई के टैक्सी ड्राइवर ने कहा, "मैं 15 साल से यहां ड्राइव कर रहा हूं, लेकिन आज जैसे आकाश ने अपना दरवाजा खोल दिया है।"

उड़ानें बाधित, बचाव तैयार

जब तूफान आसमान में उड़ता है, तो वह जमीन पर भी अपना निशान छोड़ देता है। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, चेन्नई और कोलंबो के बीच की उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। यह सिर्फ एक उड़ान की बात नहीं — यह एक अर्थव्यवस्था की बात है। तमिलनाडु के लोग श्रीलंका के साथ व्यापार, परिवार के लिए यात्रा, और आपातकालीन आपूर्ति के लिए इन उड़ानों पर निर्भर हैं। अब यह सब रुक गया है।

लेकिन जिस तरह तूफान आता है, उसी तरह तैयारी भी हो रही है। तमिलनाडु राज्य आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (SDRF) ने 47 टीमों को अलर्ट पर रखा है। वे अब घरों के बाहर नहीं, बल्कि घरों के अंदर हैं — लोगों को बता रहे हैं कि कहां जाना है, क्या लेना है, और क्या नहीं। कोई निर्णय नहीं लिया गया है कि लोगों को बाहर निकाला जाए, लेकिन मछुआरे के नावें बंद हो चुकी हैं। इसका मतलब है: अगर आपका जीवन नदी पर निर्भर है, तो आज आपका दिन खत्म हो चुका है।

इतिहास का भार: निवार से लेकर दित्वाह तक

IMD के आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर के अंत में बनने वाले साइक्लोन अक्सर तमिलनाडु के तट की ओर बढ़ते हैं। पिछला ऐसा तूफान था साइक्लोन निवार — जिसने 2020 में 53.34 अरब रुपये का नुकसान किया था। उस बार भी कावेरी डेल्टा सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था। अब दित्वाह वही रास्ता ले रहा है। क्या यह एक नया तूफान है? नहीं। यह एक पुरानी कहानी का नया अध्याय है — जिसमें खेत, घर, और जिंदगियां फिर से खतरे में हैं।

अगले कदम: क्या अब क्या होगा?

अगले 36 घंटे में सब कुछ तय हो जाएगा। अगर तूफान ठीक वैसे ही चलता है जैसा IMD ने भविष्यवाणी की है, तो रविवार की सुबह तक यह तट पर पहुंच जाएगा। लेकिन यहां एक बड़ा सवाल है — क्या आज की तैयारी कल के नुकसान को रोक पाएगी? 2020 में निवार के बाद लोगों ने कहा था, "अब कभी ऐसा नहीं होगा।" लेकिन आज फिर से वही तूफान आ रहा है। क्या हमने कुछ सीखा? या हम बस इंतजार कर रहे हैं कि बारिश बंद हो जाए?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कावेरी डेल्टा के किसानों को क्या खतरा है?

कावेरी डेल्टा भारत का सबसे बड़ा चावल उत्पादक क्षेत्र है, जहां अभी खेतों में धान की फसल पक रही है। दित्वाह के कारण बाढ़ और तूफानी हवाओं से धान की फसल डूब सकती है, जिससे लगभग 30 लाख टन चावल का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, केले, पपीता और अन्य बागान की फसलें भी नष्ट हो सकती हैं, जिससे किसानों की आय लगभग 40-50% तक गिर सकती है।

चेन्नई में बाढ़ का खतरा कितना गंभीर है?

चेन्नई के कई इलाकों में नालियां पहले से ही भरी हुई हैं, और अगले 24 घंटों में 150-200 मिमी बारिश की भविष्यवाणी है। यह उस मात्रा के बराबर है जो एक महीने में आती है। इससे अंडरपास, सड़कें और आवासीय क्षेत्र बह सकते हैं। 2023 के बाढ़ के बाद से शहर ने ड्रेनेज सुधारे, लेकिन अभी भी 12 इलाकों में जलभराव का खतरा है।

क्या तमिलनाडु सरकार ने आपातकाल घोषित किया है?

अभी तक कोई आपातकाल नहीं घोषित किया गया है, लेकिन राज्य सरकार ने सभी जिलों को अलर्ट स्थिति में रखा है। अस्पतालों को आपातकालीन आपूर्ति और इलाज के लिए तैयार किया गया है, और राष्ट्रीय आपातकालीन बल (NDRF) की टीमें तैनात हो चुकी हैं। यह एक अप्रत्याशित नहीं, बल्कि एक तैयार जवाब है।

साइक्लोन दित्वाह किस तरह निवार से अलग है?

निवार 2020 में एक तेज तूफान था जिसकी गति 110 किमी/घंटा थी, जबकि दित्वाह अभी 60-70 किमी/घंटा की है। लेकिन अंतर इसमें है कि दित्वाह अधिक लंबे समय तक रहेगा — लगभग 36 घंटे तक तट के पास रहेगा, जिससे बारिश और बाढ़ का नुकसान अधिक होगा। निवार ने अचानक विनाश किया, दित्वाह धीरे-धीरे जीवन को छीन रहा है।

मछुआरे क्या कर रहे हैं?

तमिलनाडु के तट पर 12,000 से अधिक मछुआरे हैं, जिनके नावें अब बंद हैं। उन्हें सरकार द्वारा आर्थिक सहायता दी जा रही है, लेकिन ज्यादातर लोग अपने नावों और जालों को बचाने के लिए घरों में छिपे हुए हैं। एक मछुआरा ने कहा, "हमारा जीवन समुद्र पर निर्भर है। अगर नाव डूब गई, तो अगले छह महीने भूखे रहेंगे।"

क्या यह तूफान भविष्य में और अधिक तीव्र होगा?

वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी का पानी गर्म हो रहा है, जिससे साइक्लोन अधिक तीव्र और लंबे समय तक रहने लगे हैं। 2020 के बाद से तमिलनाडु में 4 बड़े तूफान आए हैं — जो पिछले 20 सालों के औसत से दोगुना है। यह जलवायु परिवर्तन का सीधा प्रभाव है। अब सिर्फ तूफान के बाद बचाव नहीं, बल्कि आगे के लिए तैयारी जरूरी है।

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