अगर आप फैशन की बात करते हुए ‘लक्ज़री’ सुनते हैं तो कश्मीर का पश्मीना तुरंत दिमाग में आता है। लेकिन सिर्फ एक नाम नहीं, इस शॉले के पीछे कई सालों की कहानी और धागे में बसी मेहनत छिपी होती है। इस लेख में हम इतिहास से लेकर खरीद‑सेल तक हर बात को आसान भाषा में समझाएंगे, ताकि आप बिना झंझट के सही पश्मीना चुन सकें।
पश्मीना का मूल कश्मीर की पहाड़ी बस्ती‑शहरों से है जहाँ ऊँचे बरफ़ीले इलाकों में बकरी पालने वाले लोग मोटे बालों वाली बकरियों (कैश्मिरी) से ऊन निकालते थे। 15वीं सदी में यह ऊन सूती कपड़ों के साथ मिलाकर बुनाई की गई और धीरे‑धीरे शॉले बन गए। इस प्रक्रिया में हाथ‑से‑बुनी तकनीक, दो‑स्तरीय धागा (डबल यार्न) और विशेष डाइंग मशीनें मदद करती हैं, जिससे शॉल नरम, हल्का और गर्म रहता है।
आज की पश्मीना शॉले अक्सर 100% शुद्ध ऊन से बनती हैं, लेकिन बाजार में मिश्रित धागे वाली भी मिलती हैं जो सस्ते होते हैं। शॉले का रंग और डिज़ाइन कश्मीर के स्थानीय कलाकारों द्वारा हाथ‑से पैटर्न किया जाता है, इसलिए हर पीस अनोखा रहता है।
सबसे पहले शॉले की असलीपन जाँचें: अगर धागा हाथ में लेकर खींचते हैं तो यह आसानी से नहीं टूटना चाहिए और हल्का फिसलन वाला महसूस होना चाहिए। मूल पश्मीना पर ‘कश्मीर’ या ‘कैश्मिर’ का टैग, साथ ही निर्माता की प्रमाणपत्र मिलनी चाहिए। कीमत बहुत कम लग रही हो तो सावधान रहें; सच्चा शॉले 2000‑3000 रुपये प्रति मीटर से शुरू होता है और गुणवत्ता के अनुसार 8000 रुपये तक जा सकता है।
खरीदते समय पॉलिश्ड बॉक्स, धूल‑रहित पैकिंग और हल्के वजन का ध्यान रखें। शॉले को सीधा धूप में नहीं रखना चाहिए—वो रंग फीका कर देगा और फाइबर कमजोर हो जाएगा। धोने के लिए हाथ से ठंडा पानी उपयोग करें, धीरे‑धीरे घुमाएँ और फिर साफ़ पानी से रिन्स करें। यदि मशीन वॉश करनी पड़े तो ‘डिलिकेट’ मोड में कम गति पर रखें और कपड़े की थैली में डालें।
स्ट्रेचिंग के लिए शॉले को हल्के हाथों से खींचें, लेकिन ज़्यादा ताकत नहीं लगाएँ—यह फाइबर को तोड़ सकता है। रोज़ाना उपयोग करने पर दो‑तीन बार हल्की धूल साफ़ कर दें और कभी भी गर्म आयरन सीधे शॉले पर न चलाएँ; अगर इस्त्री करनी हो तो कपड़े के नीचे सूती कपड़ा रखें।
स्टाइलिंग की बात करें तो पश्मीना शॉले को सिर्फ ठंड में ही नहीं, बल्कि गरमी में भी एथनिक लुक देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे जीन्स पर या सादी टी‑शर्ट के साथ ओवरकोट की तरह पहनें, और फिर से फ़ैशन का नया ट्रेंड बन जाएँ। शॉले को बंधने वाले तरीकों (फ्रिंज, नॉट) भी कई हैं—सिम्पल ‘वेस्ट’ स्टाइल या ‘बो हार्नेस’ लुक आजकल लोकप्रिय है।
कुल मिलाकर पश्मीना शॉला सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि कश्मीर की संस्कृति और मेहनत का प्रतीक है। सही जानकारी के साथ आप न केवल सुंदर दिखेंगे, बल्कि इस विरासत को भी संरक्षित करेंगे। अब जब आपने इतिहास, खरीद‑सेल और देखभाल सब समझ ली है, तो अपनी पसंदीदा पश्मीना शॉले चुनें और अपने वॉर्डरोब में कश्मीर की ठंडी चमक जोड़ें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को अमेरिका यात्रा के दौरान एक विशेष उपहार भेंट किया। उपहार में चांदी से बना एक ट्रेन का मॉडल शामिल था। इसके साथ ही, प्रथम महिला जिल बाइडेन को एक कश्मीरी पश्मीना शॉल भी भेंट की गई। यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भारत-अमेरिका के कूटनीतिक संबंधों को उजागर करता है।
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