हर साल सरकार वित्त मंत्रालय के पास एक रिपोर्ट आती है जिसे आर्थिक सर्वेक्षण कहा जाता है. इस बार का सारांश जानने से हमें समझ आता है कि देश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में जा रही है और हमारे रोज़मर्रा के फैसले कैसे असर डाल सकते हैं.
निर्मला सीतारमन ने 31 जनवरी को बताया कि 2025‑26 में जीडीपी की वृद्धि दर 6.3% से 6.8% के बीच होगी. इसका मतलब है कि आर्थिक गति पहले सालों की तुलना में थोड़ी तेज़ है, लेकिन अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.
निवेश की बात करें तो निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों ने पिछले वर्ष से थोड़ा‑बहुत बढ़त दिखायी है. औद्योगिक निवेश 4% तक बढ़ा, जबकि बुनियादी ढाँचा (रोड, पुल, हाइवे) में खर्च 5% अधिक हुआ. छोटे व्यवसायों के लिए यह अच्छा संकेत है क्योंकि उन्हें फंडिंग और बाजार की बेहतर पहुँच मिल रही है.
महंगाई पर रिपोर्ट ने कहा कि खाद्य पदार्थों की कीमतें अभी भी उच्च स्तर पर हैं, लेकिन कुल महंगाई दर धीरे‑धीरे 4% के आसपास स्थिर हो रही है. सरकार के सब्सिडी और मूल्य नियंत्रण उपायों से यह रफ़्तार घटती दिख रही है.
अगर आप नौकरी खोज रहे हैं या नया व्यापार शुरू कर रहे हैं, तो निवेश में वृद्धि का मतलब अधिक रोजगार के अवसर हो सकते हैं. साथ ही, जीडीपी की तेज़ी से वेतन स्तरों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.
उपभोक्ता तौर पर महंगाई के रुझान को समझना जरूरी है. अगर खाद्य वस्तुओं की कीमतें अभी भी उंची रहती हैं तो बजट बनाते समय सावधानी बरतनी चाहिए, जबकि गैर‑आवश्यक चीजों में थोड़ी राहत मिल सकती है.
वैश्विक आर्थिक माहौल का उल्लेख न करना संभव नहीं; चीन और यूरोप के धीमे विकास से निर्यात पर दबाव बना रहता है. फिर भी भारत की घरेलू मांग मजबूत है, जिससे कुल मिलाकर स्थिति संतुलित रहती है.
अंत में, इस सर्वेक्षण को पढ़कर आप सरकार की नीति दिशा‑निर्देशों का अंदाज़ा लगा सकते हैं – जैसे कि कौन से सेक्टर में टैक्स रिवेट या प्रोत्साहन मिलने वाले हैं. इससे आप अपनी निवेश योजना, बचत लक्ष्य और कर रणनीति को बेहतर बना सकते हैं.
तो अगली बार जब आर्थिक सर्वेक्षण की खबर आए, तो सिर्फ शीर्षक नहीं पढ़ें, मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें. यही जानकारियां आपको रोज़मर्रा के फैसले में मदद करेगी.
केंद्रीय बजट 2024 की तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति थी, लेकिन वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अब यह 23 जुलाई को पेश किया जाएगा। आर्थिक सर्वेक्षण 22 जुलाई को पेश होने की संभावना है। यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट होगा, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण उनका सातवां बजट पेश करेंगी।
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