मुशफिकुर रहीम: बांग्लादेश के विकेटकीपर और बल्लेबाज की कहानी

जब बांग्लादेश की टीम को टेस्ट मैच में बचाने की जरूरत होती है, तो एक नाम हमेशा सामने आता है — मुशफिकुर रहीम, बांग्लादेश क्रिकेट टीम के लंबे समय तक अहम विकेटकीपर और टेस्ट क्रिकेट के असली गुरु। वो सिर्फ ग्लव्स पहनकर बैट नहीं उठाते, बल्कि टीम के लिए दबाव को भी बदल देते हैं। उनकी बल्लेबाजी में वो शांति है जो बारिश में भी टीम को बचाती है, जैसे गैले में शांतो के साथ उनकी जोड़ी ने 484 रन बनाकर टेस्ट ड्रॉ पर बचाया।

मुशफिकुर रहीम के लिए विकेटकीपिंग सिर्फ एक कौशल नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है। उन्होंने अपने करियर में दुनिया के सबसे तेज गेंदबाजों के बीच भी आँखें नहीं झपकाईं। उनकी बल्लेबाजी का असली जादू यही है कि वो तब तक बल्ला नहीं छोड़ते, जब तक टीम को बचाने की उम्मीद होती है। यही वजह है कि उनके नाम के साथ जुड़े अनगिनत ऐसे मैच हैं, जहाँ बांग्लादेश की टीम लगभग हार चुकी थी, लेकिन उनकी जिद्द ने ड्रॉ बना दिया।

उनकी बल्लेबाजी के साथ जुड़ी एक और बात भी है — वो बहुत कम बाउंड्री मारते हैं, लेकिन रन बनाने की कला में बेमिसाल हैं। उनकी पारियाँ ज्यादातर एक टीम के लिए बचाव के लिए बनती हैं, न कि दिखावे के लिए। यही वजह है कि उनके नाम के साथ टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे मैच दर्ज हैं, जहाँ वो बल्लेबाजी के बीच विकेट भी लेते रहे। उनके लिए टीम का नाम हमेशा टॉप पर रहता है।

बांग्लादेश के लिए मुशफिकुर रहीम सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक विरासत हैं। उनकी बल्लेबाजी की शैली ने एक नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित किया है — जो सिर्फ शॉट्स नहीं, बल्कि समय और दबाव के साथ खेलना जानते हैं। उनके साथ जुड़े हर मैच एक सबक है: जब टीम नीचे हो, तो एक विकेटकीपर भी टीम को बचा सकता है।

इस लिस्ट में आपको उनके सबसे यादगार पारियाँ, टीम के लिए उनके अहम योगदान, और उनके साथ बने ऐसे मैच मिलेंगे, जिन्होंने बांग्लादेश क्रिकेट को नई दिशा दी।

मुशफिकुर रहीम ने 100वें टेस्ट में सदी पूरी कर दिखाई 11वें बैटर के तौर पर इतिहास रचा

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मुशफिकुर रहीम ने बांग्लादेश के खिलाफ आयरलैंड के खिलाफ अपने 100वें टेस्ट में 100 रन बनाकर टेस्ट क्रिकेट के 146 साल के इतिहास में 11वें बल्लेबाज के रूप में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

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