हर साल भारत की सेना बड़ी‑बड़ी अभ्यासों में हिस्सा लेती है। ये ड्रिल्स सिर्फ शो नहीं, बल्कि सैनिकों को नई तकनीक और रणनीति से रूबरू कराते हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि आज‑कल कौन‑से अभ्यास चल रहे हैं और उनका असर क्या होगा, तो पढ़ते रहें।
पिछले महीनों में कुछ बड़े अभ्यासों ने देश का ध्यान खींचा है। सबसे पहले ‘ऑपरेशन वायुप्रकाश’ – यह एक संयुक्त वायु‑भूमि ड्रिल था जहाँ भारतीय एयर फ़ोर्स और इंडियन आर्मी ने मिलकर हाई‑एंड सिमुलेशन किया। इस दौरान फाइटर जेट, ड्रोन्स और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरणों का प्रयोग हुआ। दूसरा बड़ा नाम ‘अडवांस्ड कॉम्बैट ट्रेनिंग 2024’ (ACT-24) है, जिसमें पूर्वी सीमा के निकट पैनोरमिक माउंटेड टैंक, आर्टिलरी और इन्फैंट्री ने एक साथ ऑपरेशन किया। दोनों अभ्यासों का मुख्य लक्ष्य रीयल‑टाइम कम्युनिकेशन को बेहतर बनाना और तेज़ निर्णय लेना था।
साथ ही, भारत ने दक्षिण एशिया के मित्र देशों के साथ ‘ड्रिल सत्र 2024’ आयोजित किया। इस ड्रिल में समुद्री सुरक्षा, अंडरवॉटर वॉरफ़ेयर और साइबर डिफ़ेंस पर फोकस था। भागीदार राष्ट्रों ने अपने‑अपने विशेषज्ञता को साझा किया, जिससे भारतीय सेना की बहु-डोमेन क्षमताओं में सुधार हुआ।
पहला कारण – तैयारियों का वास्तविक परीक्षण। ट्रेनिंग रूम में सैद्धांतिक ज्ञान अच्छा होता है, पर मैदान में वही लागू करना अलग बात है। अभ्यास में सैनिकों को विभिन्न परिस्थितियों—जैसे बदली हुई मौसम, रात‑समय या इलेक्ट्रॉनिक जाम—का सामना कराना पड़ता है। इससे वे तनाव के तहत सही कदम उठाते हैं।
दूसरा कारण – नई तकनीक का एकीकरण। आज के युद्ध में ड्रोन, साइबर टूल और इन्फॉर्मेशन वारफेयर प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। अभ्यास के दौरान ये टेक्नोलॉजीज़ वास्तविक परिदृश्य में टेस्ट होती हैं, जिससे सेना को जल्द‑से‑जल्द अपनाने का फ़ायदा मिलता है।
तीसरा कारण – अंतरराष्ट्रीय सहयोग। संयुक्त अभ्यासों से अलग‑अलग देशों की रणनीतियों और प्रक्रियाओं को समझा जाता है। जब भारत किसी शत्रु सीमा या समुद्री क्षेत्र में कार्रवाई करता है, तो वह अपने साथी देश के साथ तालमेल रख सकता है। इस तरह का भरोसा सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि कई बार सफल ऑपरेशन्स में दिखता है।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि सैन्य अभ्यास सिर्फ ‘ड्रिल’ नहीं हैं; वे राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ को मजबूत करने वाले उपकरण हैं। अगर आप इस क्षेत्र के अपडेट चाहते हैं तो RegistrationStatus.in पर नियमित रूप से चेक करें – यहाँ आपको हर नई ड्रिल का संक्षिप्त विश्लेषण, तस्वीरें और विशेषज्ञों की राय मिलती है।
ताइवान ने अपने लड़ाकू विमानों को तैनात कर दिया है और मिसाइल सिस्टम को अलर्ट पर रखा है, क्योंकि चीन ताइवान स्ट्रेट के पास बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास कर रहा है। ताइवान ने इसे गंभीर उकसावे के रूप में वर्णित किया है। अमेरिकी सैन्य समर्थन से चीन और ताइवान के बीच तनाव बढ़ रहा है।
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