हर साल हमारे शरीर में कुछ ऐसी बीमारियाँ या चोटें आती हैं जिनका इलाज आम अस्पताल नहीं कर पाता। ऐसे मामलों को दुर्लभ सर्जरी कहा जाता है – यानी वो ऑपरेशन जो बहुत कम होते हैं, विशेष उपकरण और अनुभव की जरूरत होती है। अगर आप या आपके परिवार में कोई ऐसा रोग देख रहे हों तो डरने की बजाय सही जानकारी हासिल करना जरूरी है।
काफी तरह की दुर्लभ सर्जरी होते हैं, लेकिन सबसे आम पाँच को समझना मददगार रहता है:
इन सर्जरी का चयन सिर्फ डॉक्टर नहीं बल्कि मरीज की उम्र, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति भी तय करती है। इसलिए किसी भी दुर्लभ ऑपरेशन से पहले दो‑तीन विशेषज्ञों से सलाह लेना समझदारी है।
अब सवाल आता है – ऐसे कठिन काम को कौन कर रहा है? भारत में कुछ अस्पताल हैं जो दुर्लभ सर्जरी में माहिर हैं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार काम करते हैं:
इनमें से कोई भी अस्पताल चुनने से पहले आप उनके कैंसर बोर्ड या सर्जिकल काउंसिल का रिकॉर्ड देख सकते हैं, ऑनलाइन रिव्यू पढ़ सकते हैं और संभावित लागत के बारे में पूछताछ कर सकते हैं। अधिकांश केंद्र वित्तीय सहायता या इंस्टालमेंट प्लान देते हैं, इसलिए डरने की जरूरत नहीं है।
दुर्लभ सर्जरी अक्सर जीवन बचाने का एक आखिरी विकल्प होती है, लेकिन सही जानकारी और भरोसेमंद डॉक्टर के साथ इसका जोखिम कम किया जा सकता है। याद रखें, ऑपरेशन से पहले पूरी तैयारी, पोस्ट‑ऑप देखभाल और रीहैबिलिटेशन योजना बनाना उतना ही जरूरी है जितना सर्जरी खुद। अगर आप या आपके जानने वाले को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़े तो इस गाइड को शेयर करें, डॉक्टर से मिलें और भरोसे के साथ कदम बढ़ाएँ।
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में एक 33 वर्षीय मानसिक रोगी के पेट से डॉक्टरों ने तीन घंटे की सर्जरी में 33 सिक्के निकाले। मरीज को पेट दर्द और सूजन के साथ अस्पताल लाया गया था। जांच में उसके पेट में 247 ग्राम भार के सिक्के मिलने से सभी चौंक गए।
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