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दुर्लभ सर्जरी क्या है?

हर साल हमारे शरीर में कुछ ऐसी बीमारियाँ या चोटें आती हैं जिनका इलाज आम अस्पताल नहीं कर पाता। ऐसे मामलों को दुर्लभ सर्जरी कहा जाता है – यानी वो ऑपरेशन जो बहुत कम होते हैं, विशेष उपकरण और अनुभव की जरूरत होती है। अगर आप या आपके परिवार में कोई ऐसा रोग देख रहे हों तो डरने की बजाय सही जानकारी हासिल करना जरूरी है।

दुर्लभ सर्जरी के मुख्य प्रकार

काफी तरह की दुर्लभ सर्जरी होते हैं, लेकिन सबसे आम पाँच को समझना मददगार रहता है:

  • हृदय ट्रांसप्लांट – जब दिल पूरी तरह काम नहीं करता, तो डॉक्टर पूरे ह्रदय को बदलते हैं। यह प्रक्रिया भारत में कुछ बड़े अस्पतालों में ही की जाती है।
  • स्पाइनल कॉर्ड रिपेयर – रीढ़ की चोट से चलने‑फिरने में दिक्कत हो तो न्यूरोलॉजिस्ट विशेष तकनीक से रीढ़ को ठीक करते हैं।
  • लेव-ऑफ़ ट्यूमर सर्जरी – मस्तिष्क या अन्य अंगों में बहुत छोटे लेकिन खतरनाक ट्यूमर को हटाने के लिए माइक्रोसर्जिकल उपकरणों का इस्तेमाल होता है।
  • प्लीहा प्रत्यारोपण (स्प्लीनेक्टॉमी) – दुर्लभ रक्त रोगों के लिये प्लीहा को बदलते हैं, यह प्रक्रिया बहुत ही सटीक होती है।
  • जेनैटिक एडीटेड़ सेल थेरपी – कुछ आनुवांशिक बीमारियों में रोगी की अपनी कोशिकाओं को संशोधित करके फिर शरीर में डालते हैं। इस तकनीक अभी विकास के चरण में है, पर भारत ने कई क्लिनिकल ट्रायल कर लिये हैं।

इन सर्जरी का चयन सिर्फ डॉक्टर नहीं बल्कि मरीज की उम्र, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति भी तय करती है। इसलिए किसी भी दुर्लभ ऑपरेशन से पहले दो‑तीन विशेषज्ञों से सलाह लेना समझदारी है।

भारत में प्रमुख चिकित्सा केंद्र

अब सवाल आता है – ऐसे कठिन काम को कौन कर रहा है? भारत में कुछ अस्पताल हैं जो दुर्लभ सर्जरी में माहिर हैं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार काम करते हैं:

  • अ‍ॅपोलो हॉस्पिटल, दिल्ली – हृदय ट्रांसप्लांट और जटिल वास्कुलर सर्जरी में अग्रणी।
  • नारायण हेल्थकेयर ग्रुप, बेंगलुरु – माइक्रो‑न्यूरोसर्जरी और स्पाइनल रिपेयर में विशेषज्ञता रखता है।
  • सर्वर अस्पताल, मुंबई – ट्यूमर सर्जरी एवं लिवर ट्रांसप्लांट के लिए प्रसिद्ध।
  • अखिल भारत इंटर्नैशनल मेडिकल सेंटर (ABIMC), कोलकाता – जेनैटिक थेरपी और प्लीहा प्रत्यारोपण पर रिसर्च में आगे है।
  • इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ साइंस, चेन्नई – बहु‑विषयक टीम के साथ दुर्लभ रोगों की व्यापक देखरेख करता है।

इनमें से कोई भी अस्पताल चुनने से पहले आप उनके कैंसर बोर्ड या सर्जिकल काउंसिल का रिकॉर्ड देख सकते हैं, ऑनलाइन रिव्यू पढ़ सकते हैं और संभावित लागत के बारे में पूछताछ कर सकते हैं। अधिकांश केंद्र वित्तीय सहायता या इंस्टालमेंट प्लान देते हैं, इसलिए डरने की जरूरत नहीं है।

दुर्लभ सर्जरी अक्सर जीवन बचाने का एक आखिरी विकल्प होती है, लेकिन सही जानकारी और भरोसेमंद डॉक्टर के साथ इसका जोखिम कम किया जा सकता है। याद रखें, ऑपरेशन से पहले पूरी तैयारी, पोस्ट‑ऑप देखभाल और रीहैबिलिटेशन योजना बनाना उतना ही जरूरी है जितना सर्जरी खुद। अगर आप या आपके जानने वाले को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़े तो इस गाइड को शेयर करें, डॉक्टर से मिलें और भरोसे के साथ कदम बढ़ाएँ।

हिमाचल प्रदेश में मानसिक रोगी के पेट से निकले 33 सिक्के, डॉक्टर भी रह गए हैरान
Abhishek Rauniyar

Abhishek Rauniyar

हिमाचल प्रदेश में मानसिक रोगी के पेट से निकले 33 सिक्के, डॉक्टर भी रह गए हैरान

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में एक 33 वर्षीय मानसिक रोगी के पेट से डॉक्टरों ने तीन घंटे की सर्जरी में 33 सिक्के निकाले। मरीज को पेट दर्द और सूजन के साथ अस्पताल लाया गया था। जांच में उसके पेट में 247 ग्राम भार के सिक्के मिलने से सभी चौंक गए।

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